Thursday, 26 September 2019

कब तक

हम आज उस मुहाने पर खड़े हैं जहां गांधी की प्राथमिका और भी बढ़ जाती है, गांधी उतने ही जरूरी ही जितने वो है, हम गांधी के पीछे तो चल सकते है लेकिन उनसे आंगे बढ़ निकलने के लिए हमे ईमानदारी से उनके पथ पर चलना होगा , जिस सामाजिक चेतना की बात गांधी ज़िंदगी भर करते रहे है वो चेतना आज भी उसी तरह अचेत पड़ी है , हम गांधी को कितना जान पाये आज तक ! इसका उदाहरण शिवपुरी की घटना से मिलता है, सामाजिक विघटन कितना कम हुई है,
गांधी एक विराम का नाम, एक सहनशीलता ,,एक सालीनता , सत्याग्रह का नाम है, अहिंसा का नाम है , ये वो शख्स था जिसने शब्दों के अर्थ बदल दिये , हमेशा हमेशा के लिए, हम आज जब अहिंसा को सुनते है तो एक शब्द सुनाई देता है और वो शब्द है "गांधी " |
गांधी ने दलित वर्ग के लिए एक शब्द और रचा था वो था "हरिजन" ईश्वर का एक रूप या ईश्वर की संतान, लेकिन इस रूप को कुरूप आज तक किया जा रहा है, हरिजन नाम शायद इस विश्वास से दिया गया था के हम धर्म के नाम पर उन्हे बख्स दें , कमसेकम उन्हे इंसान तो मान ही सकेंगे , जिस अहंकार दंभ का निर्माण सदियों पहले हुआ था वो आज भी बदस्तूर जारी है , न जाने कितने मासूमों को अपनी कुर्बानी देनी पड़ेगी, गांधी की बात में इसलिए बार बार कर रहा हूँ क्योकि गांधी के नाम पर आजकल देश में झाड़ू चल रही है , कई बार लगता है ये एक सनक है सत्ता की, जो हर दिन एक नया करतब दिखाती है, अरबों रुपया का बंदर बाँट चल रहा है कागजों में शौचालय बन रहे है, या जो बन रहे है वो एक औपचारिकता मात्र है, बड़े बड़े विज्ञापन करते हुये उद्योगपतियों की जेबें गर्म की जा रही है, नेताओ की व्यवहार तो और भी शर्मनाक है ,पहले कचरा फैलाया जा रहा है फिर कैमरे के सामने उसे साफ किया जा रहा है,वही सफाई कर्मचारियों की तंख्वाह के लिए पैसा नहीं होता, न जाने कितने सफाई कर्मचारी सीवर को साफ करते हुये मौत का शिकार हो जाते है, वही उनके पीछे उनका परिवार गरीबी की कोख में ज़िंदगी भर घुटता रहता है, कब उसका नया जन्म होगा, कब उसे समाज में जीने के बराबर अधिकार मिलेंगे, कब तक उसकी साँसों में गंदी बस्तियों की दुर्गंध उसके जीवन को नरक की उपधी देती रहेगी , तब तक उसके कानो में जातिसूचक शब्दों का जहर भरा जाएगा जो समूचे समाज को एक दिन नष्ट कर देगा, न जाने कब उसकी देह पवित्र होगी, कब तक वो प्रेम के हाथों बिकेंगे , कब तक सभ्य समाज अपने दिल में भरी सदियों की नफरत को उन गंदी बस्तियों में फेकेंगे और उन्हे गले लगाएंगे ,,,,,,,
कब तक !